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गिलोय के औषधीय फायदे- लाभ जानकर हो जाएंगे हैरान।

आजकल अधिकतर सुनने में आ रहा है कि बुखार से छुटकारा पाने के लिए गिलोय का काठा पिलाएँ। आखिर गिलोय कौन सा पौधा है, कहाँँ पाया जाता है, किन किन रोगों में कारगर होता है इसका वर्णन इस लेख के माध्यम से करने का प्रयास किया जा रहा है
गिलोय के फायदे

गिलोय के अन्य नाम:-

                                 गिलोय को गुडूच, अमृतगिलोय , गुडुची आदि नामों से भी जाना जाता है इसे मराठी में गलों कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया तथा यह मनीस्प्रमेसी कुल के अंतर्गत आते है। गिलोय को दिव्य औषधि माना जाता है।

गिलोय का प्राकृतिक आवास:-

                                                 गिलोय की पत्तियां हृदय के आकार की होती है तथा देखने में पान के पत्ते की तरह लगती है। इसका पौधा लता के रूप में होता है जो कि भारत, म्यामार व श्रीलंका में भरपूर मात्रा में जंगली रूप में उगता हुआ देखा जा सकता है। इसकी पत्तियां 10 से 20 सेंटीमीटर लंबी तथा 8 से 15 सेंटीमीटर चौड़ी होती है। गिलोय की लताएं जंगलों पहाड़ों खेतों की मेड़ों चट्टानों आदि स्थानों पर पाई जाती है। इसकी लताएं वृद्धि के लिए दूसरे वृक्षों को अपना आधार बनाती है।ये जिस वृक्ष पर चढ़ जाती है उस वृक्ष के गुण इस लता में आ जाते हैं यह नीम आम सहजन सभी पेड़ों पर चढ़ जाती है नीम पर चढ़ी गिलोय को सर्वश्रेष्ठ औषधि माना जाता है यह विषम परिस्थितियों में भी उग जाती है। लता के तने के टुकड़े करके इन्हें नमी युक्त वातावरण में रख दिया जाए तो वह फूटने लगती हैं इसके तने के टुकड़े को गमले या घर के नजदीक की छोटी क्यारियों में भी लगाया जा सकता है पौधे की वृद्धि होने पर इसे रस्सी के सहारे आप मनचाहे स्थान पर घर की दीवार या छत पर भी ले जा सकते हैं।

गिलोय के अवयव:-

                              एक ग्लूकोसाइड गिलोइन के कारण इसका स्वाद कड़वा होता है।इसमें कोलम्बिन, टिनोस्पोरेसाइड,पामेटिन,बर्बोरिनडाईसैकेराइड,कोलीन तथा टीनोस्पोटिक एसिड पाए जाते हैं। यह सभी जैव सक्रिय पदार्थ हैं इनकी पत्तियों में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम फास्फोरस तथा प्रोटीन पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। इसमें एंटीवायरल और एंटीबायोटिक तत्व भी होते हैं।

गिलोय के लाभ:- 

                        गिलोय निम्न रोगों में प्रयोग किया जाता है-

(1)   पीलिया:-

                        पीलिया में गिलोय के 4-5 पत्तों और 5 इंच की लता को लेकर जूस निकालकर हर एक दिन छोड़कर पूरे 10 दिन पीने से पीलिया से छुटकारा मिल जाता है। इसकी लताओं का काठा भी तैयार करके पिया जा सकता है चूँकि इसका स्वाद थोड़ा तीखा होता है इसलिए इसमें थोड़ी सी मिश्री भी मिला सकते हैं( जिन्हें मधुमेह ना हो)।

(2)  चेहरे की झुर्रियांँ:-

                                   यदि चेहरे पर झुर्रियां पड़ रही हैं तो गिलोय को पीसकर या पेस्ट बनाकर चेहरे पर 15 मिनट  के लिए लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो ले ऐसा करने से चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियां कम हो जाती हैं।

(3) शरीर की जलन:

                                  यदि शरीर या हाथ पैरों में जलन होती है तो गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवले के साथ मिलाकर काढ़ा बनाकर प्रतिदिन दो तीन बार पीने से हाथों पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है। इसका अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके अधिक प्रयोग से खुजली भी हो सकती है और गर्भवती महिलाओं को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
गिलोय के रस में शहद मिलाकर लेने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है गिलोय के रस में पीपल का चूर्ण और शहद मिलाकर लेने से तेज बुखार और खांसी ठीक हो जाती है गिलोय लेने से मोटापा भी कम होता है गिलोय शरीर में ग्लूकोज के ऑक्सीकरण दर को बढ़ाता है तथा रक्त शुद्ध करता है।
                                 इस लेख के माध्यम से गिलोय के औषधीय गुणों के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी दी गई क्योंकि यह लता हम सभी के घरों के आसपास उपलब्ध है परंतु आम लोग इसके महत्वपूर्ण गुणों के बारे में नहीं जानते हैं इस लेख को पढ़ने से आपको इसके गुणों के बारे में कुछ ज्ञान अवश्य मिला होगा।

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